पाठ: 13 – महादेवि वर्मा :– जाग तुझको दूर जाना प्रश्न और उत्तर Class 11

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Kshitij chapter – 13 Mahadevi Varma :- Jaag Tujhko Door Jana Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास

1. ‘जाग तुझको दूर जाना’ कविता में कवयित्री मानव को किन विपरीत स्थितियों में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित कर रही है?

Answer:

“जाग तुझको दूर जाना” कविता में कवयित्री मानव को अद्वितीय तरीके से प्रेरित कर रही है। वह यह कह रही है कि चाहे हिमालय की तरह कठोर और स्थिर हृदय में कितनी भी कंपन उत्पन्न हो, या फिर चाहे आकाश में अगर प्रलयंकारी आंसू भी बहने लगे, तुम्हें निरंतर आगे बढ़ने का निर्णय लेना है।

वह कहती है कि चाहे अंधकार तुम्हारे चारों ओर पूरे प्रकाश को भी छिपा दे, या फिर बिजली के गड़गड़ाहट और भयंकरता में कितना ही नाशवान तूफान आ जाए, तुम्हें इस पथ पर आगे बढ़ने का निर्णय करना है। 

वह यह भी कहती है कि तुम्हें इस अनावरणिक पथ पर अपना अमर बलिदान देना होगा ताकि तुम अपने अमिट निशान को छोड़ सको, जिससे अन्य लोग भी उसका अनुसरण कर सकें।

2. कवयित्री किस मोहपूर्ण बंधन से मुक्त होकर मानव को जागृति का संदेश दे रही है?

Answer:

कवयित्री संसारिक मोहपूर्ण बंधनों से मुक्त होकर मानव को जागरूक होने का संदेश दे रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि मानव को अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सदैव जागरूक और सक्रिय रहना चाहिए।

वह इसका भी महत्व बताती है कि मानव को निराशा, उदासीनता और निष्क्रियता को अपने से दूर रखना चाहिए। क्योंकि ये सभी चीजें उसके मार्ग में आगे बढ़ने की ओर बाधाएँ डाल सकती हैं और उसे रोक सकती हैं।

उसकी कविता एक गहरी प्रेरणा है, जो हमें अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर करने के लिए हमेशा मनोबल बनाए रखने की महत्वपूर्णता को समझाती है। इसके बिना, हम जीवन के चुनौतियों से निराश हो सकते हैं और अपने लक्ष्यों से दूर हो सकते हैं।

3. ‘जाग तुझको दूर जाना’ स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचित एक जागरण गीत है। इस कथन के आधार पर कविता की मूल संवेदना को लिखिए।

Answer:

‘जाग तुझको दूर जाना’ एक स्वाधीनता आंदोलन का जागरण गीत है, जो हमें स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। इस गीत में भयानक कठिनाइयों की चिंता करने की बजाय, हमें कोमल बंधनों के आकर्षण से मुक्त होकर हमारे लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ने का आह्वान है।

इस कविता में यह संदेश है कि हमें स्वाधीनता की कामना करने वाले लोगों को भौतिक आकर्षणों और मोह-माया के बंधनों से मुक्त रहकर अपने मार्ग पर निरंतर बढ़ना चाहिए। स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए हमें अपनी कमजोर भावनाओं को पार करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

यह गाना हमें याद दिलाता है कि स्वाधीनता की प्राप्ति का मार्ग बहुत कठिन हो सकता है, और हमें अपने आप को समर्पित और सावधान रखना होगा। यह सत्य है कि संघर्ष के दौरान हारेंगे, लेकिन इससे हमारे लक्ष्य की ओर बढ़ने का संकेत भी मिलता है। इसलिए हमें संघर्ष को निरंतर जारी रखने की महत्वपूर्णता को समझना चाहिए।

4. निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –

(क) विश्व का क्रंदन’ ……………….  ‘अपने लिए कारा बनाना! 

Answer:

भाव सौंदर्य- भौंरों की मधुर गुजार और दुख के कारण रोते बिलखते विश्व के विलाप को यह कविता नहीं भूलती। फूलों की पंखुड़ियों पर फैली ओस की आकर्षक बूँदें एक दृढ़-प्रतिज्ञ व्यक्ति को नहीं डूबा सकतीं।

इसके साथ ही, तुम्हें अपनी परछाई को अपना बंधन नहीं बनने देना चाहिए, अर्थात मार्ग में ही विश्राम मत करना चाहिए। तुम्हें निरंतर जागरूक बने रहना चाहिए, अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए। इसका संदेश है कि स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए हमें सांसारिक मोह-माया और भौतिक आकर्षणों के नश्वर बंधनों से मुक्त रहकर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

शिल्प-सौंदर्य- 

1. ‘मधुर की मधुर’ अनुप्रास अलंकार की छटा है।

2. ओज गुण की प्रधानता है।

3. सरल, सहज खड़ी बोली का प्रयोग है।

4. प्रश्नात्मक शैली का प्रयोग किया गया है।

5. ‘बनाना-जाना’ के माध्यम से लय-तुक का निर्माण किया गया है।

6. स्वाधीनता प्राप्ति के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नश्वर भौतिक आकर्षणों के बंधन से मुक्त होना आवश्यक है।

(ख) कह न ठंडी साँस” ………………. ‘सजेगा आज पानी।

Answer:

भाव-सौंदर्य- कवयित्री उन व्यक्तियों से बात कर रही है जो अपने जीवन में वेदना, पीड़ा, और करूणा को महत्वपूर्ण मानते हैं। वह उनसे कह रही है कि वे अपनी दुःख-भरी कहानी को अपने मार्ग की ओर बढ़ते रहें, ठंडी सांसों से उसे नहीं बुझाएं, अर्थात अपने दुःख की कहानी को कुछ कहे बिना भूल जाएं।

वह कहती है कि जब हमारे हृदय में उत्साह होता है, तब ही हमारी आँखों में आँसू सुंदरता से शोभित हो सकते हैं, अर्थात हमारे हृदय में जितना उत्साह होगा, उतना ही हमारे आत्म-सम्मान की भावना बढ़ सकती है।

इसका संदेश है कि हमें अपने दुःखों को निरंतर उन्नति की ओर देखना चाहिए और उसे हमारे जीवन के अगले चरण में सीखने और बढ़ने का एक अवसर मानना चाहिए।

शिल्प-सौंदर्य- 

1. कवयित्री ने कोमल भावनाओं को त्याग कर बलिदान-पंथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी है। 

2. ‘सजेगा आज पानी’- यहाँ ‘पानी’ में श्लेष अलंकार है।

3. संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है।

4. ओज-गुण से युक्त पंक्तियाँ हैं।

5. लय-तुक से युक्त पंक्तियाँ हैं। 

(ग) है तुझे अंगार-शय्या’ ………………. ‘कलियाँ बिछाना!

Answer:

भाव-सौंदर्य- कवयित्री मनुष्यों को जागरूकता का संदेश देते हुए उन्हें कोमल भावनाओं का त्याग करने की सलाह देते हैं। उनके अनुसार, स्वाधीनता की तलाश में हमें बड़े ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, और हमें अपने प्यार को इसी कठिन मार्ग पर बिछाना होता है। इस तरीके से, हमें अपनी कोमल भावनाओं को न्योछावर करना होगा, जब हम स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए अपने बलिदान के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।

शिल्प-सौंदर्य-

1. संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रयोग है।

2. ‘अंगार- शय्या’ में रूपक अंलकार है।

3. ‘अंगार- शय्या पर मृदुल कलियाँ बिछाना’ में विरोधाभास अलंकार है ।

4. भाषा सरल, सहज तथा प्रवाहमयी है। 6. ओज गुण की प्रधानता है।

5. कवयित्री ने बलिदान-पथ पर चलने के लिए कोमल भावनाओं के त्याग को आवश्यक बताया है। 

5. कवयित्री ने स्वाधीनता के मार्ग में आनेवाली कठिनाइयों को इंगित कर मुनष्य के भीतर किन गुणों का विस्तार करना चाहा है? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

Answer:

कवयित्री ने स्वाधीनता के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों का संकेत करते हुए मनुष्य के भीतर निर्भीकता, अटल संघर्ष की भावना, कठिन परिस्थितियों में असली स्थिरता, सांसारिक मोह-माया का त्याग, और तीव्र बलिदान की भावना जैसे गुणों का महत्व बताया है। इन गुणों के साथ, मनुष्य स्वतंत्रता प्राप्त कर सकता है। ये गुण स्वाधीनता की प्राप्ति के मार्ग पर सफलता पाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

योग्यता- विस्तार

1. स्वाधीनता आंदोलन के कुछ जागरण गीतों का एक संकलन तैयार कीजिए।

Answer:

स्वाधीनता आंदोलन के कुछ जागरण गीतों का संकलन निम्नलिखित है :-

1. “वन्दे मातरम्” – इस गीत का शिर्षक स्वाधीनता संग्राम के समय में विशेषकर पॉट्रियोट्स द्वारा गाया जाता था। यह गीत देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव प्रकट करता है।

2. “सारे जहाँ से अच्छा” – यह गीत मोहम्मद इकबाल द्वारा लिखा गया था और इसमें भारत के सुंदर संस्कृति और समृद्धि की महिमा गाई गई है।

3. “रघुपति राघव राजा राम” – यह भजन गांधीजी द्वारा प्रिय था और स्वाधीनता संग्राम के दौरान बड़े ही लोकप्रिय था। इसमें भगवान राम की महिमा गाई गई है और इसे आज भी धर्मिक सांगितिक कार्यक्रमों में गाया जाता है।

4. “वतन की आन बसो” – इस गीत में देशभक्ति की भावना को बड़े ही सुंदरता से व्यक्त किया गया है, और यह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोकप्रिय था।

5. “कदम कदम बढ़ाए जा” – यह गीत स्वतंत्रता संग्राम की आग में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लिखा गया था। इसमें स्वतंत्रता के लिए कदम बढ़ाने की भावना है।

ये गीत स्वतंत्रता संग्राम के समय की आवाज़ को सुनाते हैं और लोगों को देश के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

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