क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध है नोट्स कक्षा 9

Kya Hamare Aas Paas ke Padarth Shudh hai Notes Class 9

Is matter around us pure Notes in Hindi

शुद्ध” शब्द का अर्थ होता है पदार्थ में कोई मिलावट न हो परन्तु एक वैज्ञानिक भाषा में सभी वस्तुएँ शुद्ध नहीं है।

शुद्ध पदार्थ से तात्पर्य है कि उस पदार्थ में मौजूद सभी कण समान रासायनिक प्रकृति के हो।

या

एक शुद्ध पदार्थ एक ही प्रकार के कणों से मिलकर बना होता है ।

पदार्थ क्या है?

पदार्थ एक प्रकार का द्रव्य है जो कि भौतिक प्रक्रमों द्वारा अन्य प्रकार के द्रव्य में पृथक नहीं किया जा सकता है।

मिश्रण क्या है- मिश्रण एक पदार्थ है जो दो या अधिक तत्वों अथवा यौगिकों का, (रासायनिक रूप से संयुक्त हुए बिना) बना होता है। उदाहरण-वायु, गैसों जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइ-ऑक्साइड और जल वाष्प आदि मिश्रण है।

मिश्रण के प्रकार:

मिश्रण दो प्रकार के होते हैं:
(1) समांगी मिश्रण (Homogeneous mixtures)
(2) विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous mixtures)

1. संमागी मिश्रण-वे मिश्रण जिनमें पदार्थ परस्पर पूर्ण रूप से मिश्रित होते हैं संमागी मिश्रण कहलाते हैं।
उदाहरण-जल में शर्करा का विलयन संमागी मिश्रण है।

2. विषमांगी मिश्रण- वे मिश्रण जिसमें पदार्थ पृथक रहते हैं और एक पदार्थ छोटे कणों के रूप में, दूसरे पदार्थ में हर जगह फैला रहता है, विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं।
उदाहरण- शक्कर और बालू का मिश्रण, एक विषमांगी मिश्रण है।

विलयन: विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण है।

उदाहरण- नींबू जल, सोडा जल आदि विलयन के उदाहरण हैं।

किसी विलयन को दो भागों विलायक और विलेय में बाँटा जाता है।
विलयन का वह घटक जो दूसरे घटक को विलयन में मिलाता है. उसे विलायक कहते हैं।

मिश्रण को पृथक करने के तरीके :

1.वाष्पीकरण (Evaporation)-
इस प्रक्रिया में मिश्रण के दो पदार्थों में से एक पदार्थ का वाष्पीकरण हो जाता है।

2.अपकेन्द्रीकरण (Centrifugation)-
जब किसी पदार्थ को तेजी से घुमाया जाता है तो भारी कण नीचे की तरफ दबाव डालते हैं तथा हल्के कण ऊपर चले जाते हैं।
उदाहरण-दूध से क्रीम पृथक करना।

3.पृथक्करण कीप (Deferential entraction funnel)-
दो अघुलनशील द्रव (जो दोनों एक साथ नहीं घुल सकते) को आसानी से पृथक्करण कीप द्वारा अलग कर सकते हैं।
पृथक्कारी कीप का स्टॉप कार्क खोलने से पानी दूसरे बीकर में इकट्ठा कर सकते हैं तथा दूसरे बीकर में बचा तेल इकट्ठा कर सकते हैं।

अनुप्रयोग (Application)-
पानी से तेल पृथक करना।

4.उर्ध्वपातन विधि (Sublimation)
दो पदार्थों के बीच एक पदार्थ उर्ध्वपातित हो जाता है (सीधे ठोस से गैस में परिवर्तित हो जाता है) जबकि दूसरा ऐसे ही रहता है।

5. क्रोमैटोग्राफी (Chromatography)
मूल सिद्धान्त- किसी मिश्रण में रंगीन यौगिक, रंजित कणों को पृथक कर सकते हैं। किसी सोखने वाले फिल्टर पेपर की सहायता से जब पानी (या किसी भी विलयन) के कण ऊपर की ओर दो अलग-अलग रंग के साथ जाते हैं तो क्रोमेटोग्राफी पेपर द्वारा दोनों पृथक हो जाते हैं। क्योंकि दोनों रंग अलग-अलग गति से सोख लिये जाते हैं।

अनुप्रयोग (Application)-
1.रंग (डाई) को पृथक करने के लिए।

2.क्लोरोफिल से रंजक (Pigment) पृथक करने के लिए।

3.खून से ड्रग पृथक् करने में।

6. आसवन विधि (Distillation)-
दो घटकों (Component) के बीच एक का क्वथनांक दूसरे से कम होता है। यह विधि दो या दो से अधिक घुलनशील द्रवों को अलग करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण-जब पानी और एसिटोन के मिश्रण
को गर्म किया जाता है, क्योंकि एसिटोन का क्वथनांक (Boiling point) कम होता है, यह गर्म होकर वाष्पित होकर ट्यूब में चला जाता है जहाँ यह फिर द्रव बन जाता है। इस प्रकार एसिटोन बीकर में एकत्र हो जाता है जबकि पानी फ्लास्क में ही रह जाता है।

7. क्रिस्टलीकरण (Crystallisation)
मूल सिद्धान्त किसी मिश्रण से अशुद्धियों को दूर करने के लिए पहले किसी उपयुक्त विलयन में घोलना और क्रिस्टलीकरण द्वारा एक संगठन को पृथक करना।

उदाहरण-कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल को (अशुद्ध) पहले सल्फ्यूरिक अम्ल में घोलते हैं और फिर गर्म करके विलयन को पृथक किया जाता है। जो विलयन बना था उसे पूरी रात रख कर छोड़ दिया जाता है, अतः केवल शुद्ध कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल बनते हैं जबकि अशुद्धियाँ सल्फ्यूरिक अम्ल में ही रह जाती है। इस विलयन को फिल्टर पेपर की सहायता से छान लिया जाता है और शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त कर लिए जाते हैं।

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