NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 8 वाख प्रश्न और उत्तर

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij Chapter 8 Vakh Questions and Answers

जीवन-परिचयः सन् 1320 ई. में कश्मीरी भाषा की लोकप्रिय संत ललद्यद का जन्म कश्मीर स्थित पाम्पोर के सिमपुरा गाँव में हुआ था। उनको ओर भी नामों से जाना जाता था जैसे लल्लेश्वरी, ललारिफा, लाल्ल योगेश्वरी आदि। उनके जीवन के बारे में ज्यादा प्रामाणिक जानकरी नहीं है लेकिन ऐसा माना जाता है कि 1391 ई. के आसपास उनकी मृत्यु हुई।

प्रश्न 1. ‘रस्सी’ यहां किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है?

उत्तर: ‘रस्सी’ यहा पर मानव के शरीर या सांस के लिए प्रयुक्त हुई है और यह रस्सी कच्ची तथा नाशवान है। यह कब टूट जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है।

प्रश्न 2. कवयित्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे हैं?

उत्तर: कवयित्री सांसारिक मोह माया के बंधनों से मुक्त नहीं हो पा रही है। ऐसे में वह प्रभु भक्ति सच्चे मन से नहीं कर पा रही है। अतः उसे लगता है, कि उसके द्वारा की जा रही सारी साधनाएं व्यर्थ हुई जा रही हैं। इसलिए उसके द्वारा मुक्ति के प्रयास भी विफल होते जा रहे हैं।

प्रश्न 3. कवयित्री का ‘घर जाने की चाह’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: कवयित्री का घर जाने की चाहत से तात्पर्य प्रभु से मिलना है। कवयित्री इस भवसागर को पार करके अपने परमात्मा की शरण में जाना चाहती है।

प्रश्न 4. भाव स्पष्ट कीजिए:
(क) जेब टटोली कौड़ी न पाई।
(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं,
न खाकर बनेगा अहंकारी।

उत्तर: (क) कवयित्री कहती है कि इस संसार में आकर वह संसारिकता में उलझ कर रह गई है और जब अंत समय आया और जेब टटोली तो कुछ भी हासिल ना हुआ। अब उसे चिंता सता रही है कि भवसागर पार कराने वाले मांझी अर्थात ईश्वर को उतराई के रूप में क्या देगी।

(ख) प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री ने मनुष्य को ईश्वर प्राप्ति के लिए मध्यम मार्ग अपनाने को कहा है। कवयित्री कहती है कि मनुष्य को भोग विलास में पडकर कुछ भी प्राप्त नहीं होगा। और मनुष्य जब संसारीक भोगों को पूरी तरह से त्याग देता है तब उसके मन में अहंकार की भावना पैदा होती हैं। अतः सभी को सुख-दुख के मध्य का मार्ग अपनाना चाहिए।

प्रश्न 5. बंद द्वार की सांकल खोलने के लिए ललद्यद ने क्या उपाय सुझाया है?

उत्तर: बंद द्वार की सांकल खोलने के लिए ललद्यद ने उपाय सुझाया है कि भोग विलास और त्याग के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। मनुष्य को सांसारिक विषयों में ना तो अधिक लुप्त और ना ही उसमें अधिक विरक्त होना चाहिए। बल्कि उसे बीच का मार्ग अपनाना चाहिए।

प्रश्न 6. ईश्वर प्राप्ति के लिए बहुत से साधक हठयोग जैसी कठिन साधना भी करते हैं लेकिन उससे भी लक्ष्य प्राप्त नहीं होता। यह भाव किन पंक्तियों में व्यक्त हुआ है?

उत्तर: उपयुक्त भाग निम्न पंक्तियों में व्यक्त हुआ है:
आई सीधी राह से, गई ना सीधी राह,
सुषम-सेतु पर खड़ी थी, बीत गया दिन आह!
जेब टटोली कोड़ी न पाई।
मांझी को दूं, क्या उतराई?

प्रश्न 7. ‘ज्ञानी’ से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: ज्ञानी से कवयित्री का यह अभिप्राय है कि जिसने आत्मा और परमात्मा के संबंध को जान लिया हो। कवयित्री के अनुसार, ईश्वर का निवास तो हर एक कण-कण में है। परंतु मनुष्य इसे धर्म में विभाजित कर मंदिर और मस्जिद में पहचानने की कोशिश करता है।

प्रश्न 8. हमारे संतों, भक्तों और महापुरुषों ने बार-बार चेताया है कि मनुष्यों में परस्पर किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता, लेकिन आज भी हमारे समाज में भेदभाव दिखाई देता है-

(क) आपकी दृष्टि में इस कारण देश और समाज को क्या हानि हो रही है?

(ख) आपसी भेदभाव को मिटाने के लिए अपने सुझाव दीजिए।

उत्तर-

(क) हमारे समाज में जाति-धर्म, भाषा, संप्रदाय आदि के नाम पर भेदभाव किया जाता है। इससे समाज और देश को बहुत हानि हो रही है। यह समस्या कानून व्यवस्था के सामने एक गंभीर समस्या बनकर उठ खड़ी होती है तथा विकास पर किया जाने वाला खर्च अकारण नष्ट होता है। 

(ख) आपसी भेदभाव मिटाने के लिए वोट की खातिर किसी धर्म विशेष का तुष्टीकरण बंद करना होगा। लोगों को सहनशील बनना होगा, सर्वधर्म समभाव की भावना लानी होगी तथा कट्टरता का त्याग करना होगा।

पाठेतर सक्रियता

प्रश्न 9. भक्तिकाल में ललद्द्यद के अतिरिक्त तमिलनाडु की आंदाल, कर्नाटक की अक्क महादेवी और राजस्थान की मीरा जैसी भक्त कवयित्रियों के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए एवं उस समय की सामाजिक परिस्थितियों के बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर- छात्र स्वयं करें।

अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर

प्रश्न. वाख क्या है?

उत्तर: ललद्यद की काव्य-शैली को वाख कहा जाता है। जिस तरह से हिंदी में कबीर के दोहे और मीरा के पद।

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