दुख का अधिकार / Dukh ka Adhikar Class 9

दुख का अधिकार – लेखक परिचय

इस पाठ के लेखक यशपाल है। यशपाल का जन्म फिरोजपुर वनी में सन् 1903 में हुआ। इन्होंने आरंभिक शिक्षा स्थानीय स्कल में और उच्च शिक्षा लाहौर में पाई। यशपाल विद्यार्थी काल से ही क्रांतिकारी गतिविधियों में जुट गए थे। अमर शहीद भगत सिंह आदि के साथ मिलकर इन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया।

यशपाल की प्रमुख कृतियाँ हैं : देशद्रोही, पाटॉ कामरेड, दादा कामरेड, झूठा सच तथा मेरी, तेरी, उसकी बात (सभी उपन्यास), ज्ञानदान, तर्क का तूफान, पिंजरे की उड़ान, फूलों का कुर्ता, उत्तराधिकारी (सभी कहानी संग्रह) और सिंहावलोकन (आत्मकथा)।

‘मेरी, तेरी, उसकी बात पर यशपाल को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। यशपाल की कहानियों में कथा रस सर्वत्र मिलता है। वर्ग संघर्ष, मनोविश्लेषण और पैना व्यंग्य इनकी कहानियों की विशेषताएँ हैं।

यशपाल यह मानते रहे कि समाज को उन्नत बनाने का एक ही रास्ता है- सामाजिक समानता के साथ-साथ आर्थिक समानता। यशपाल ने अपनी रचनाओं में हिंदी केअलावा उर्दू और अंग्रेजी के शब्दों का भी बेहिचक प्रयोग किया है।

प्रस्तुत कहानी देश में फैले अंधविश्वास और ऊँच-नीच के भेद-भाव को बेनकाब करते हुए यह बताती है कि दुख की अनुभूति सभी को समान रूप से होती है। कहानी धनी लोगों की अमानवीयता और गरीबों की मजबूरी को भी पूरी गहराई से उजागर करती है यह सही है कि दु:ख सभी को तोड़ता है, दुःख में मातम मनाना हर कोई चाहता है, दु:ख के क्षण से सामना होने पसब अवश हो जाते हैं, पर इस देश में ऐसे भी अभागे लोग हैं जिन्हें न तो दुःख मनाने का अधिक है, न अवकाश !

शब्दार्थ:

पोशाक – वस्त्र
अनुभूति – एहसास
अड़चन – रुकावट
अधेड़ – आधी उम्र का
व्यथा – पीड़ा
व्यवधान – बाधा
बेहया – बेशर्म
नीयत – इरादा
बरगद – लाभ
खसम – पति
लुगाई – पत्नी
सूतक – छूत
निर्वाह – गुजारा

दुःख का अधिकार प्रश्न उत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए:

प्रश्न 1. किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें क्या पता चलता है?

उत्तर: किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें उसके दर्जे का पता चलता है।

प्रश्न 2. खरबूजे बेचने वाली स्त्री से कोई खरबूजे क्यों नहीं खरीद रहा था?

उत्तर: खरबूजे बेचने वाली स्त्री से कोई खरबूजे इसलिए नहीं करेगा आता, क्योंकि मैं मुंह छुपाए , मुंह घुटनों पर रख कर रो रही थी।

प्रश्न 3. उस स्त्री को देखकर लेखक को कैसा लगा ?

उत्तर: उस स्त्री को देखकर लेखक के मन में उसके रोने को जानने की भावना उठी।

प्रश्न 4. उस स्त्री के लड़के को मृत्यु का कारण क्या था?

उत्तर: उस स्त्री के लड़के की मृत्यु क्या कारण था कि वह खेत में से खरबूजा चुनते समय एक सपनों से काट लिया था इस कारण उसके लड़के की मृत्यु हो गई थी।

प्रश्न 5.बुढ़िया को कोई भी क्यों उधार नहीं देता?

उत्तर: उस बुढ़िया के परिवार में केवल उसका लड़का ही काम आता था और उसके मरने के बाद लोगों का डर लगने लगा कि उनके पैसे वापस कौन देगा।

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में लिखिए

प्रश्न 1. मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्व है?

उत्तर: मनुष्य के जीवन में पोशाक का बहुत बड़ा महत्व है। पोशाक सिर्फ शरीर ढकने के काम नहीं आती बल्कि मनुष्य का दर्जा बताती है। हम जब कभी किसी व्यक्ति से मिलते हैं तो पहले से पोशाक देखते हैं क्योंकि पोशाक से ही मनुष्य की पहचान पता चलती है।

प्रश्न 2 पोशाक हमारे लिए कब बंधन और अड़चन बन जाती है?

उत्तर: पोशाक हमारे लिए जब बंधन और अड़चन बन जाती है , जब हम अपने से नीचे दर्जे वाले के साथ उसका दुख बाटते हैं।

प्रश्न 3. लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नहीं जान पाया ?

उत्तर: लेखक उस स्त्री के रोने का कारण किस लेने की जानकारी क्योंकि वह फटे पुराने कपड़े पहने को फुटपाथ पर बैठी थी तथा लेखक उनके कपड़ों की कारण नहीं पूछ पाया क्योंकि वह अगर अच्छे कपड़े पहन कर हमसे पूछे तो उनके मर्यादा को ठेस पहुंचती।

प्रश्न 4. भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था?

उत्तर: भगवाना साहब के पास उसकी बीवी का जमीन दी उस पर कछियारी करके अपने परिवार का निर्वाह करता था।

प्रश्न 5. लड़के को मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूजे वेचने क्यों चल पड़ी?

उत्तर: लडके की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूजे बेचने चल पड़ी क्योंकि बेटे के छोटे-छोटे बच्चे तथा उसकी तबीयत खराब थी वह बहुत भूखी थी इन सब कारणों के कारण गुड़िया खरबूजे बेचने चल पड़ी।

प्रश्न 6. बुडिया के दुःख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला आई?

उत्तर: बढ़िया के दुख को देखकर लेखक अपने पड़ोस की संभांत महिला की याद आ गई, क्योंकि उसके बेटे का भी देहांत हो गया था , परंतु से इन दोनों की तो कितना नहीं जा सकता था । क्योंकि मैं अमीर होने के कारण उसके पास अपना दुख प्रकट करने के कई समय से पर एक बुढ़िया जो बहुत ही गरीब उसे बस कोई सीमित समय नहीं था।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में लिखिए:

प्रश्न 1. बाज़ार के लोग खरबूजे बेचनेवाली स्त्री के बारे में क्या-क्या कह रहे में लिखिए।

उत्तर: बाजार के लोग खरबूजे बेचने वाली स्त्री के बारे में बहुत बुरी बुरी बातें कह रहे थे कोई उसे बेशर्म बिहार रोटी के टुकड़े में पलने वाली है कई लोग तो उस पर थूक कर जा रहे थे। ऐसे लोगों को कुछ ना बात ही नहीं और दूसरे को भी जीने नहीं दे सकते।

प्रश्न 2. पास-पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को क्या पता चला?

उत्तर: पास – पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को यह पता चला कि एक बुढ़िया का बेटा मर चुका है। वह खरबूजा खरबूजा चाहता था उसको सांप ने काट लिया फिर बेटे को बचाने के चक्कर में सारे के सारे पैसे खत्म हो गए इसके तथा इसका बेटा ही एकमात्र घर में काम आने वाला था जिस कारण यह बाजार में खरबूजे बेचने आई हैं।

प्रश्न 3. लड़के को बचाने के लिए बुढ़िया माँ ने क्या-क्या उपाय किए?

उत्तर: लड़के को बचाने के लिए बुढ़िया मां ने अनेक उपाय किए उसने सारा अनाज दान में दे दिया था तथा मौलवी को बुलाकर झाड़-फूंक करवाई। परंतु उसका बेटा बच नही पाया।

प्रश्न 4. लेखक ने बुढ़िया के दुःख का अंदाजा कैसे लगाया ?

उत्तर: लेखक गुड़िया के दुकान अंदाजा कुछ इस प्रकार लगाया। पिछले साल इसके आस पड़ोस में एक महिला के पुत्र की मृत्यु हो गई तो उसने उसकी बात सोचकर यह अंदाजा लगाया कि इसके पास तो समय ही नहीं है कि अपने पुत्र के मरने का शोक मनाए क्योंकि इसके परिवार का सारा सारे जिसके कंधों पर ना किया है उसके पास समय नहीं नहीं है कि अपने पुत्र का शोक मना पाए।

प्रश्न 5. इस पाठ का शीर्षक ‘दुःख का अधिकार’ कहाँ तक साथक है?

उत्तर: इस कहानी में उस बुढ़िया के विषय में बताया गया है, जिसका बेटा मर गया है। धन के अभाव में बेटे की मृत्यु के अगले दिन ही वृद्धा को बाज़ार में खरबूज़े बेचने आना पड़ता है। बाज़ार के लोग उसकी मजबूरी को अनदेखा करते हुए, उस वृद्धा को बहुत भला-बुरा बोलते हैं। कोई घृणा से थूककर बेहया कह रहा था, इसलिए इस पाठ का शीर्षक दुःख का अधिकार सार्थक है।

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