धूल / Dhool class 9 solutions

पाठ : 1 धूल (Dhool class 9 solutions)

लेखक परिचय

इस पाठ के लेखक रामविलास शर्मा है।रामविलास शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में सन् 1912 में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गाव में पाई। उच्च शिक्षा के लिए से लखनड आ गए। यहाँ में इन्हंने अग्रेज़ी में एम. किया और विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में प्राध्यापक हो गए। प्राध्यापक काल में ही इन्होंने पीस डी. की उपाधि अर्जित के। लेखन के सेत्र में पहले-पहले कविता लिखकर फिर एक उसनयाम और नाटक लिखने के बाद पुरी तरह से आलोचना कार्य में जुट गए। रामविलास शर्मा प्रगातिशील आलोचना के संशकत हस्ताकषर माने जाते हैं। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास और महाप्राण नियला कार्य को नए निकष पर परखा।

रामविलास शर्मा की प्रमुख कृतियों है : भारत और उनका पुग, महाकीर प्रसाद द्विवेदर्दी और हिंदी नवजागरण, प्रेमचंद और उनका युग, निराला की साहित्य साधना (तौन खंड), भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिंदी (कौन खंड), भाषा और समाज भारत में अंग्रेजी राज और मा्सवट इतिहास दर्शन, भारतीय संस्कृति और हिंदी प्रदेश, गांधी आंबेडकर, लोहिया और भारतीय पतिहास की समस्या बुद्ध वैराग्य और प्रारंभिक कविताएँ, सदियां के सोये जाग उठे (कंवित), याप की पुजी (नाटक), चार दिन (उपन्यास) और अपनी धरती अपने लोग (आत्मकथा) ।

रामविलास शर्मा को साहित्य अकादमी, व्यास सम्मान, शलाका सम्मान आदि मे सम्मानित किया गया। उन्होंने पुरस्कार स्वरूप मिली राशि साक्षरता प्रसार हेतु दान कर दी।

कई मुहावरों, लोकोक्तियों, देशज शब्दों और अन्य रचनाकारों को रचनाओं के ठद्दरणों में सी गई आकृति तथा पत्तियों से ओत-प्रोत इस पाठ में लेखक ने दूल की महिमा और माहात्, उपलब्धता और उपयोगिता का बखान किया है। अपनी किशोर और पुवावस्था में पहलवानी के शीकीन रहे डॉ. शर्मा अपने इस पाठ के बहाने पाठकों को अख्या़ी, गाँवों और शहरों के जीवन-जगत की भी सैर कराते हैं। साथ ही घुल के नन कं के वर्णन से देश प्रेम तक का पाट पढ़ने से नहीं चूकते। इस पाठ को पढ़ने के बाद पाठक ‘बूल को यूँ ही धूल में न उड़ा सके।

शब्दार्थ:

खरादा हुए – सुडौल और चिकना बनाता हुआ
रेणु – धुल
शृंगार – सजावट
पार्थिवता – पृथ्वी से संबंधित, मिट्टी संबंधी

अभिजात – कुलीन
प्रसाधन सामग्री – श्रृंगार की सामग्री
गोधूलि -सायंकाल जंगल से लौटते समय गायों के। खुर से उड़ती हुई धूलि

संसर्ग – संपर्क
कनिया – गोद
विज्ञापित – सूचित

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक दो पंक्तियों में दीजिए:

प्रश्न1. हीरे के प्रेमी उसे किस रूप में पसंद करते हैं?

उत्तर: हीरा की फिल्में उसे साफ – सुथरा तथा आंखों में चकाचौंध पैदा करता हुआ देखना पसंद करते हैं।

प्रश्न2. लेखक ने संसार में किस प्रकार के सुख को दुर्लभ माना है?

उत्तर: लेखक ने अखाड़े की मुट्ठी में लेटने के सुख को दुर्लभ माना है।

प्रश्न3. मिट्टी की आभा क्या है? उसकी पहचान किससे होती है?

उत्तर: मिट्टी की आभा धूल है, उसकी पहचान दूर से ही होती है।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए:

प्रश्न1. धूल के बिना किसी शिशु की कल्पना क्यों नहीं की जा सकती?

उत्तर: धूल के बिना किसी पशु की कल्पना इसलिए नहीं की जा सकती क्योंकि दूर में पढ़कर शिशु कई प्रकार के खेल खेलते हैं उनके मुंह पर मिट्टी तथा धूल पढ़ते होंगे अंदर की सुंदरता नहीं कराती है इसलिए हम धूल के बिना किसी शिशु की कल्पना नहीं कर सकते।

प्रश्न2. हमारी सभ्यता धूल से क्यों बचना चाहती है?

उत्तर: हमारी सभ्यता धूल से इसीलिए बचना चाहती है क्योंकि उन्हें लगता है कि धूल उनकी सुंदरता छीन लेती है इस कारण वह ऊंची ऊंची बातों पर रहते हैं ताकि बाद उनसे बस सके उनको नहीं पता की धूल कोई बुरी चीज नहीं है।

प्रश्न3. अखाड़े की मिट्टी की क्या विशेषता होती है?

उत्तर: अखाड़े की मिट्टी को दूध तेल तथा मट्ठे से मिलाया जाता है इस वजह से अखाड़े की मुक्ति साधारण मिट्टी से भिन्न होती है।

प्रश्न4. श्रद्धा, भक्ति, स्नेह को व्यंजना के लिए धूल सर्वोत्तम साधन किस प्रकर है?

उत्तर: श्रद्धा, भक्ति, स्नेह की व्यंजना के लिए धूल सर्वोत्तम साधन इसलिए है क्योंकि क्षत्रिय स्थान में धूल को अपने माथे से लगाकर तथा पहलवान अखाड़े में धूल को माथे से लगाकर उसके बाद अपना श्रद्धा तथा भक्ति प्रकट करता है इसलिए श्रद्धा, भक्ति, स्नेहा की व्यंजना के लिए धूल सर्वोत्तम साधन है।

प्रश्न5. इस पाठ में लेखक ने नगरीय सभ्यता पर क्या व्यंग्य किया है?

उत्तर: इस पाठ में लेखक ने नागरिया सभ्यता पर यह व्यंग किया है कि वह धूल से बचना चाहते हैं। उन्हें भूल से कोई मतलब नहीं हैं, उन्हें तो सिर्फ कांच के हीरे पसंद है। इस पाठ में लेखक ने नागरिक सभ्यता पर यह बैन किया है।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए:

प्रश्न1. लेखक ‘बालकृष्ण’ के मुंह पर छाई गोधूलि को श्रेष्ठ क्यों मानता है?

उत्तर: लेखक ‘बालकृष्ण’ के मुंह पर छाई गोधूलि को श्रेष्ठ इसलिए मानते हैं, क्योंकि वह गोधूलि का महत्व जानते हैं और उन्हें पता है कि गोधूलि उनके मुंह पर निखार प्रकट करती है। इसलिए लेखक बालकृष्ण के मुंह पर छाई गोधूलि को श्रेष्ठ मानते हैं।

प्रश्न2. लेखक ने धूल और मिट्टी में क्या अंतर बताया है?

उत्तर: लेखक ने धूल और मिट्टी में अंतर बताया कि धूल और मिट्टी दोनों एक दूसरे से मिलते जुलते शब्द है। धूल और मिट्टी मैं उतना ही अंतर है जैसे शब्द और रस में सूरज और चांद मैं।

प्रश्न3. ग्रामीण परिवेश में प्रकृति धूल के कौन-कौन से सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है?

उत्तर: ग्रामीण परिवेश में प्राकृतिक धूल के इन इन से सुंदर चित्र में प्रस्तुत करती है। शिशु के मुंह पर जिस प्रकार फूल शोभा प्रगट करते हैं ठीक उसी प्रकार धूल भी शिशु के मुंह पर शोभा प्रकट करती है। शाम की धुल ग्रामीण परिवेश में इतनी सुंदर लगती है वह शहरों में नहीं लगती।

प्रश्न4. ‘हीरा वही घन चोट न टूटे’- का संदर्भ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए?

उत्तर: हीरा वही घन झूठ न टूटे इसका अर्थ है कि हथौड़े की चोट से भी ना टूटे ठीक उसी प्रकार ग्रामीण लोग भी मेहनत करते हैं कभी हार नहीं मानते।

प्रश्न5. धूल, धूलि, धूली, धूरि और गोधूलि की व्यंजनाओं को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: धूल, धूलि, धूली, धूरि और गोधूलि की योजनाओं को स्पष्ट निम्न प्रकार से किया गया है।

– ‘धूल’ जीवन का यथार्थवादी गद्य है।

– ‘धूलि’ उसी जीवन की कविता है।

– ‘धूली’ छायावादी दर्शन है।

– ‘धूरि’ लोक संस्कृति का नवीन संस्करण है।

– ‘गोधूलि’ गायों एवं ग्वालों के पैरों से उड़ने वाली धूलि है।

प्रश्न6. ‘धूल’ पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पाठ धूल में लेखक ने धूल के महत्व का बताइए। इसमें उसने बताया है, कि शहर के लिए किस प्रकार धूल से डरते हैं, परंतु ग्रामीण लोगों की सुंदरता का उसे सी आई है।

प्रश्न7. कविता को विडंबना मानते हुए लेखक ने क्या कहा है?

उत्तर: लेखक ने जब पुस्तक विक्रेता द्वारा भेजा निंमत्रण पत्र पढ़ा कि गोधूलि की बेला में आने का आग्रह था तो उसने इसे कविता की विडंबना माना क्योंकि कवियों ने गोधूलि की महिमा बताई है परन्तु यह गोधूलि गायों ग्वालों के पैरो से उड़ती ग्राम की धूलि थी शहरी लोग इसकी सुंदरता और महत्ता को कहाँ समझ पाते हैं। इसका अनुभव तो गाँव में रहकर ही किया जा सकता है। यहाँ तक कि कविता के पास भी इसके महत्व के बयान की क्षमता नहीं होती।

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