फ्रांसीसी क्रांति / france ki kranti history in hindi

Francisi Kranti Class 9 notes-History- Chapter-1

फ़्रांसीसी (France) क्रांति की शुरुआत 14 जुलाई 1789 में पेरिस शहर से हुई।

लोगों के समूह ने बास्तील क़िले की जेल को तोड़ डाला जो लोगों की घृणा का केंद्र था। 

फ़्रांसीसी क्रांति के समय लूई xvl फ़्रांस का सम्राट था। लूई xvl बूर्बो राजवंश से था। 

फ़्रांस का राष्ट्रगान ‘मार्सिले’ कवि रॉजेट दि लाइन ने लिखा था। फ़्रांस में 1794 तक चलने वाली मुद्रा का नाम लीव्रे था। लूई xvl के राज्यरोहण के समय फ़्रांस की स्थिति:- 

  1. राजकोष का ख़ाली होना। 
  2. युद्धों के कारण वित्तीय संसाधनो का नष्ट होना। 
  3. शानो शौकत के लिए फिज़ूलखर्ची। 
  4. दस अरब लीव्रे से अधिक का क़र्ज़।  

फ़्रांसीसी क्रांति से पूर्व फ़्रांस की वित्तीय स्थिति बहुत ख़राब थी। 

18वी शताब्दी में फ़्रांसीसी समाज तीन एस्टेट में विभाजित था। 

एस्टेट का अभिप्राय है कि फ़्रांस में समाजी हैसियत को अभिव्यक्त करने वाली श्रेणी। 

  1. प्रथम एस्टेट:- इसमें पादरी वर्ग शामिल है। पादरी वर्ग के लोगों चर्च के विशेष कार्यों की करने वाला वर्ग था। 
  2. द्वितीय एस्टेट:- इसमें अमीर वर्ग को  कुलीन वर्ग कहा गया है। 
  3. तृतीय एस्टेट:- इस वर्ग में साधारण लोग होते है। जैसे:- व्यापारी, कर्मचारी, किसान, कारीगर आदि आम लोग शामिल है। 

फ़्रांसीसी सम्राट लूई xvl के द्वारा 5 मई 1789 को एस्टेट्स जेनराल की बैठक बुलाई गई। 

तीसरे एस्टेट के प्रतिनिधि 20 जून को वर्साय के इन्डोर टेनिस कोर्ट में एकत्रित हुए। 

4 अगस्त 1789 की रात को असेंबली ने करो, कर्त्तव्यों और बंधनो वाली सामंती व्यवस्था के ख़ात्मे का आदेश पारित किया। 

लोग राजनीति क्लबों में अड्डे जमा कर नीतियो पर चर्चा करते थे, इनमे जैकोबिन क्लब सब से सफल रहा। 

जैकोबिन क्लब का नेता मैक्समिलियन रोबेस्पेयर था। 

1791 में नेशनल असेंबली ने संविधान का निर्माण किया जिसका उद्देश्य था सम्राट की शक्तियों पर अंकुश लगाना।

21 जनवरी 1793 को अदालत द्वारा लूई xvl को फ़ांसी दे दी गई। 

1793 से 1794 तक की अवधि अंताक का युग कहलाती है। 

रोबोस्पेयर ने अपनी नीतियो को सख़्ती से लागू किया, अंतत: जुलाई 1794 में उसे दोषी क़रार दिया गया और गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया। गिलोटिन दो खंभो

डिरेक्ट्री की राजनीति अस्थिरता ने फौजी तानाशाह  नेपोलियन बोनापार्ट के उदय का रास्ता खोल दिया। 

नेपोलियन ने 1804 में स्वयं को फ़्रांस का सम्राट घोषित कर दिया। 

1815 में वाटरलू की लड़ाई में उसकी हार हुई। 

Francisi Kranti-Question and Answer-Class 9th Social Science- Chapter-1

Q1. फ्रांस में क्रांति की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई?

Ans. निम्नलिखित परिस्थितियों में फ्रांस में क्रांतिकारी विरोध का प्रकोप होता है :

(i) सामाजिक असमानता: फ्रांस सामाजिक असमानता से पीड़ित था। पादरी और कुलीन लोगों ने शानदार जीवन व्यतीत किया और जन्म से कई विशेषाधिकारों का आनंद लिया। जबकि किसान और मजदूर बहुत कठिन जीवन जीते थे। उन्हें भारी कर चुकाना पड़ता था।

(ii) असाधारण राजा: लुइस XVI ने शानदार जीवन और बेकार उत्सवों पर बहुत पैसा खर्च किया। उच्च पदों को आम तौर पर नीलाम किया जाता था जो प्रशासन में अक्षमता का कारण बनता था। लोगों को इस तरह की व्यवस्था से चिढ़ थी।

(iii) बदतर आर्थिक स्थिति: युद्ध के लंबे वर्षों ने फ्रांस के वित्तीय संसाधनों को सूखा दिया था। इस तरह से अतिरिक्त अदालत को बनाए रखने की लागत को कम किया गया। इन खर्चों को पूरा करने के लिए, राज्य को उन करों को बढ़ाने के लिए मजबूर किया गया था जो फ्रांस के लोगों को परेशान करते थे।

(iv) तत्काल कारण: 5 मई, 1789 को, लुई सोलहवें ने असेंबली ऑफ एस्टेट्स जनरल को नए करों के प्रस्तावों को पारित करने के लिए एक साथ बुलाया। यह फ्रांसीसी क्रांति का तत्काल कारण साबित हुआ।

Q2. फ्रांसीसी समाज के किन समूहों को क्रांति का लाभ मिला? किन समूहों को सत्ता त्यागने के लिए मजबूर किया गया? क्रांति के परिणाम से समाज का कौन सा वर्ग निराश हुआ होगा?

Ans. फ्रेंच समाज के सौम्य समूह :

(i) तीसरी संपत्ति के सभी समूहों को क्रांति से लाभान्वित किया गया। इनमें किसान, कारीगर, भूमिहीन श्रमिक, नौकर, व्यापारी, न्यायालय के अधिकारी, वकील आदि शामिल थे।

(ii) पादरी और कुलीनता जिन्होंने कई विशेषाधिकार प्राप्त किए थे, वे शक्ति त्यागने के लिए मजबूर थे।

(iii) सामंती प्रभु, रईसों, पादरियों और महिलाओं को क्रांति के परिणाम से निराशा हुई होगी।

Q3. उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के दौरान दुनिया के लोगों के लिए फ्रांसीसी क्रांति की विरासत का वर्णन करें?

Ans. दुनिया के लोगों के लिए फ्रेंच क्रांति की विरासत: फ्रेंच क्रांति (1789) के परिणाम केवल फ्रेंच के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों के लिए भी कई महत्वपूर्ण परिणाम लाए:

(i) इसने यूरोप के लगभग हर देश और दक्षिण और मध्य अमेरिका में क्रांतिकारी क्षेत्रों को प्रेरित किया।

(ii) फ्रांसीसी क्रांति ने ‘राष्ट्र’ शब्द को इसका आधुनिक अर्थ दिया। राष्ट्र वह क्षेत्र नहीं है जिससे संबंधित लोग निवास करते हैं बल्कि लोग स्वयं हैं।

(iii) इसने मनमाने शासन को समाप्त किया और लोगों के गणतंत्र के विचार को विकसित किया।

(iv) इस क्रांति ने लोगों को स्वतंत्रता के आदर्श से प्रेरित किया जो संप्रभुता का आधार बना।

(v) इसने सामाजिक समानता की अवधारणा दी, अर्थात् देश के सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार।

(vi) इसने विश्व बिरादरी के विचार को भी फैलाया।

Q4. उन लोकतांत्रिक अधिकारों की एक सूची तैयार करें, जो आज हमे मिले हुए हैं और जिनकी उत्पत्ति फ्रांसीसी क्रांति से है।

Ans. हम फ्रांसीसी क्रांति में आज के निम्नलिखित लोकतांत्रिक अधिकारों की उत्पत्ति का पता लगा सकते हैं :

1) समानता का अधिकार

2) स्वतंत्रता का अधिकार

3) शोषण के खिलाफ अधिकार

4) शैक्षिक अधिकार

5) बोलने की स्वतंत्रता

6) जीने का अधिकार

Q5. क्या आप इस दृष्टिकोण से सहमत होंगे कि सार्वभौमिक अधिकारों के संदेश में नाना अंतर्विरोध थे? 

Ans. फ्रांस गणराज्य की स्थापना की गई थी और समानता इसके मार्गदर्शक सिद्धांतों में से एक बन गई थी, सार्वभौमिक अधिकारों का संदेश विरोधाभासों के साथ बगल में था।

महिलाओं को मताधिकार नहीं दिया गया।

कोई संपत्ति नहीं रखने वाले नागरिक इस अधिकार से वंचित थे।

केवल करदाताओं के उच्चतम वर्ग से संबंधित लोगों को ही वोट देने का अधिकार दिया गया था।

Q6. नेपोलियन के उदय की व्याख्या कीजिए?

Ans.(1) राजनितिक अस्थिरता: नेपोलियन बोनापार्ट का उदय भी फ्रांसीसी क्रांति का अप्रत्यक्ष परिणाम था। फ्रांस में  राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता थी, और सत्ता के लिए संघर्ष था।

(2) नया संविधान: जैकबियन सरकार के पतन के बाद, एक नया संविधान पेस किया गया। इस संविधान के तहत संपतिविहिन समाज को मत देने का अधिकार नहीं था।

(3) इस संविधान में विधान परिषदों का प्रावधान था। इस परिषदों ने 5 सदस्यों वाली एक कार्यपालिका- डिरेक्ट्री कि नियुक्ति किया।

(4) इस प्रावधान के जरिए जैकोबिन के शासनकाल वाली एक व्यक्ति केंद्रीय कार्यपालिका से बचने की कोशिश की गई। लेकिन डिरेक्ट्री का झगड़ा अक्सर विधान परिषदों से होता था और परिषदो से होता था और परिषद उन्हें बर्खास्त करने की चेष्टा करती थी डिरेक्ट्री की राजनैतिक अस्थिरता ने सैनिक नेपोलियन बोनापार्ट के उदय का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

(5) इस मौके का फ़ायदा उठाकर नेपोलियन बोनापार्ट ने 1804 को खुद को फ्रांस का सम्राट घोषित कर दिया।

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