ncert solutions for class 9 social science geography chapter 4 – Jalvayu

जलवायु(Jalvayu) – Class 9 Geography Chapter-4

मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द ‘मौसिम’ से हुई है जिसका अर्थ है – ‘मौसम’। 

किसी क्षेत्र की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक – अशांश, ऊँचाई, वायुदाब, पवन तंत्र, समुद्री से दूरी, महासागरीय धाराये तथा उच्चावच है। 

लू – यें धुलभरी, गर्म और शुष्क पवने होती है जो मई – जून में दिन के समय भारत के उतर एवं उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में चलती हैं। 

विश्व में सबसे अधिक वर्षा मासिनराम में होती है। भारत की जलवायु को मांसिनरम में होता है। भारत की जलवायु को मानसूनी जलवायु कहा जाता है। जेट धारा – ऊपरी क्षोभमंडल के संकीर्ण शेत्र में तीव्र वेग से बहने वाली पवने है। एलनीनो एक गर्म जलधारा है। यह पेरू के तट पर उत्पन्न होती है, और पेरू की शीतधारा को अस्थायी रूप से हटाकर उसका स्थान ले लेती है। 

मानसून का फटना – अचानक ही कई दिनो तक वर्षा का लागतार होना और प्रचंड रूप रखना मानसून का फटना कहलाता है। वर्षा ऋतु में भारत में हवायें समुद्र से स्थल की और चलने लगती है, जिन्हें हम मानसूनी हवायें कहते है। 

मानसूनी हवाओं को दो भागो में बाँटा जाता है :

  1. दक्षिणी – पश्चिमी मानसून 
  2. उत्तरी – पूर्वी मानसून। 

भारत में अधिकांश वर्षा दक्षिणी – पश्चिमी मानसून से होती है। 

भारत की ऋतुएँ – भारत में मुख्य चार ऋतुएँ पायी जाती है। 

  1. शीत ऋतु – मध्य नवम्बर से फ़रवरी तक 
  2. ग्रीष्म ऋतु – मार्च से मई तक 
  3. वर्षा ऋतु – जून से सितम्बर 
  4. लौटते हुए मानसून की ऋतु – अक्टूबर से नवम्बर 

अभ्यास के प्र्श्न उत्तर: 

प्रश्न 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।नीचे दिए गए स्थानों में किस स्थान पर विश्व में सबसे अधिक वर्षा होती हैं?

  1. सिलचर

2. चेरापूंजी

3. मासिनराम

4. गुवाहटी

उत्तर. 3. मानिसराम

(ii) ग्रीष्मऋतु में उत्तरी मैदानों में बहने वाली पवन को निम्नलिखित में से क्या कहा जाता है?

  1. ††काल वैशाखी
  2. व्यापारिक पवने
  3. लू
  4. इनमे से कोई नहीं

उत्तर. 3. लू

(iii) निम्नलिखित में से कौन- सा कारण भारत के उत्तर – पश्चिम भाग में शीतऋतु में होने वाली वर्षा के लिए उत्तरदायी है?

  1. चक्रवातीय अवदाब
  2. पश्चिमी विक्षोभ
  3. मानसून की वापसी
  4. दक्षिणी- पश्चिमी मानसून

उतर. 2. पश्चिमी विक्षोभ

(iv) भारत में मानसून का आगमन निम्नलिखित में से कब होता है?

  1. मई के प्रारंभ में
  2. जून के प्रारंभ में
  3. जुलाई के प्रारंभ में
  4. अगस्त के प्रारंभ में

उतर. 2. जून के प्रारंभ में

(v)  निम्नलिखित में से कौन- सा भारत में शीतऋतू की विशेषता है?

1. गर्म दिन एवं गर्म राते

2. गर्म दिन एवं ठंडी राते

3. ठंडा दिन एवं ठंडी राते

4. ठंडा दिन एवं गर्म राते

उत्तर. 2. गर्म दिन एवं ठंडी राते

प्र्श्न: 2 निम्नलिखित प्र्श्नो के उत्तर दीजिए:-

1)भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कौन – कौन से कारक है ?

उत्तर:: भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों में अशांश देशांतर, स्थान की ऊँचाई, पवनदाब, महासागरीय धारा, समुद्र से दूरी तथा उसकी भौतिक  संरचना आदि  तत्वो को शामिल किया जा सकता है।

2) भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु क्यों हैं ? 

उत्तर: मानसून पवने प्रायः ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों  में 20° उत्तरी तथा 20° दक्षिणी अक्षांशो 

के मध्य चलती हैं। और भारत उपमहाद्वीप में हिमालय की शृखलाओं की उपस्थिति के 

कारण ये पवने लगभग दो से पाँच माह तक इस क्षेत्र को अपने प्रभाव में ले लेती है  और 

सारे वातावरण को वर्षामय बना देती है। अतः यही कारण है कि भारतीय जलवायु को मानसूनी 

प्रकार की जलवायु कहा जाता है। 

3) भारत के किस भाग में दैनिक तापमान अधिक होता एवं क्यों ? 

उत्तर: तापमान की दृष्टि से भारत के थार मरुस्थल का दैनिक तापमान सबसे अधिक होते है। इसका कारण यह है कि यहाँ दूर – दूर तक रेत का विस्तार है। दिन के समय रेत एक गर्म हो जाती है और तापमान बढ़ जाता है। 

4) किन पवनो के कारण मालाबार तट पर वर्षा होती है। 

उत्तर: मालाबार तट पर दक्षिणी – पश्चिमी पवनो के कारण वर्ष होती है। 

5) जेट धाराएँ क्या है तथा वे किस प्रकार भारत की जलवायु को प्रभावित करते है ?

उत्तर: जेट धाराएँ – ये एक संकरी पट्टी में स्थित शोभमंडल में अत्यधिक ऊँचाई (12,000 मीटर से अधिक) वाली पश्चिमी हवाएँ होती है। इनकी गति गर्मी में 110 कि. मी. प्रति घंटा एवं सर्दी में 184 कि. मी. प्रति घंटा होती है। बहुत – सी अलग- अलग जेट धाराओ को पहचान गया है। उनमें सबसे स्थिर  मध्य अक्षांशीय एवं उपोउष्ण कटिबंधीय  जेट धाराएँ है। 

जेट धाराएँ, लगभग 27° से 30° उत्तर अशांशो के बीच सिथ्त होती है, इसलिए इन्हें उपोउष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट धाराएँ कहा जाता है। भारत में, ये जेट धाराएँ ग्रीष्म ऋतु को छोड़कर पूरे वर्ष हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती है। इस पश्चिमी प्रवाहके द्वारा देश के उत्तर एवं उत्तर पश्चिमी भाग में पश्चिमी चक्रवात विक्षोभ आते है। गर्मियो में सूर्य की आभासी गति के साथ ही उपोउष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट हिमालय के उत्तर मेंचली जाती है।

एक पूर्वी जेट धारा जिसे उष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट धारा कहा जाता है। गर्मी के महीनो में प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर लगभग 14° उत्तरी अशांश में प्रवाहित होती है। 

6) मानसून को परिभाषित करें। मानसून में विराम से आप क्या समझते है। 

 उत्तर: मानसूनकीपरिभाषा – मानसून शब्द अरबी भाषा के शब्द ‘मौसम’ से निकल है जिसका अर्थ है ऋतु। इस प्रकार मानसून मौसमी पवने है जो विभिन्न ऋतुओं में अपनी दिशाएँ बदलती रहती है। 

मानसून में विराम – भारत में होने वाली 90 प्रतिशत वर्षा ग्रीष्म ऋतु की दक्षिण – पश्चिमी मानसून पवनो से होती है और 10 प्रतिशत शरद ऋतु की उत्तर – पूर्वी मानसून पवनो द्वारा।

इन मानसून पवनो के लक्षण निम्नलिखित है – 

  1. मानसून पवने बहुत शक्तिशाली और वेगशील होती है। प्रायः उनके साथ गर्जन और बिजली का चमकना भी होता है। वे एक प्रकार से तूफ़ान के रूप में आती है, इसलिए उनके आने को ‘मानसून का फटना’ कहते है। 
  2. तमिलनाडु के पूर्वी तट को छोड़कर शेष भारत में होने वाली अधिकतर वर्षा ग्रीष्म ऋतु की मानसून पवनो से ही प्राप्त होती है। 
  3. यह वर्षा न तो लगातार होती है और न ही नियमित रूप से होती है। 
  4. मानसून पवनो से होने वाली वर्षा का वितरण भी समान नहीं होती। कुछ क्षेत्रो में अत्यधिक वर्षा होती है तो कुछ क्षेत्र बिल्कुल शुष्क रह जाते है। 
  5. हिमालय पर्वत क्षेत्र में निम्न दाब के क्षेत्र बनने से पर्वतीय क्षेत्र में भारी वर्षा होती है जिससे मैदान क्षेत्रो में भयानक बाढ़े आजाती है या फिर लंबे समय तक मैदानो में अनावृष्ति की सिथति बनी रहती है। 

7) मानसून को एक सूत्र में बाधने वाला क्यों समझा जाता है ? 

उत्तर: हिमालय पर्वत द्वारा ठंडी पवनो को रोकने के फलस्वरूप भारत के अपेकशकृत उच्च अक्षाशों पर परिस्थित होने के बावजूद उत्तरी भारत का तापमान अपेकशकृत ऊँचा बना रहता है। इसी प्रकार प्रायद्वीपीय क्षेत्र में समुद्र की उपस्थिति के कारण वहाँ तापमान न बहुत अधिक और न ही बहुत कम होती है। परंतु इस समकारी प्रभाव के बावजूद भी भारतीय प्रायद्वीप में मानसून को एक सूत्र में बाँधने वाला समझा जाता है।

मानसून पवनो की दिशा का ऋतुओ के अनुसार बदलना तथा उनसे संबंधित ऋतु की दशाएँ ऋतु चक्रों को एक लय प्रदान करती है। यदि कुछ अपवादों की छोड़ दियाजाए तो भारत का प्रत्येक क्षेत्र मानसून द्वारा वर्षा प्राप्त करता है। कुछ स्थान ऐसे भी है जहाँ वर्षा ऋतु में भी लोग पानी के लिए तरसते है।

इस प्रकार मानसूनी पवनो का विचित्र व्यवहार और वर्षा की अनिशीचतता  यहाँ के निवासियो को प्रभावित करती है तथा संपूर्ण भारतवासियों द्वारा इसके आने का इंतज़ार बड़ी व्यग्रता से किया जाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि हिमालय पर्वत तथा मानसून ने भारतीय जलवायु पर आधारित भौगालिक एकता को बनाए रखा है। 

प्र्श्न:3 उत्तर  भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा क्यों घटती जाती है ?

उत्तर: बंगाल की खाड़ी से उठाने वाली मानसून पवने भारत में सबसे पहले उत्तर पूर्वी में ही प्रवेश करती है। भारत के उत्तर में स्थित विशाल हिमालय पर्वत इन्हें आगे नहीं जाने देता। वाष्प से भारी होने के कारण ये पवने इस भाग में ख़ूब जमकर वर्षा करती है। इसके पश्चात् यह हिमालय के साथ- साथ पूर्व से पश्चिम की ओर बढती है, इनमे वाष्प की मात्रा कम होती है। परिणाम स्वरूप उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर जाते हुए वर्षा की मात्रा घटती जाती है। 

प्र्श्न:4 कारण बताइए :- 

  1. भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन क्यों होता है ?

उत्तर: भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन का मूल कारण हैं- स्थल तथा जल पर विपरीत वायदाब क्षेत्रों का विकास होना, जो वायु के तापमान के कारण होता है। स्थल और जल असमान रूप में गर्म होते है। ग्रीष्म ऋतु में समुद्र की अपेक्षा स्थलीय भाग अधिक गर्म हो जाता है। परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों में निम्न वायुदबीय क्षेत्र विकसित हो जाता है।

जबकि समुद्री क्षेत्रों में उच्च वायुदाब का क्षेत्र होता है। अत: समुद्री क्षेत्रों से स्थल की ओर पवने चलने लगती है। शीत ऋतु में स्थिति इसके विपरीत होती है। परिणामस्वरुप पवनो की दिशा बदल जाती है अर्थात अब पवने स्थल भाग से समुद्री क्षेत्रों की ओर चलने लगती है। 

2. भारत में अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनो में होती है।

उत्तर: भारत में अधिकतर वर्षा जून से सितम्बर तक होती है। मई महीनो में भारत के उत्तरी भागो में बहुत अधिक गर्मी पड़ती है। जिससे वायु हल्की होकर ऊपर की ओर उठ जाती है। फलस्वरूप यहाँ वायुदाब कम हो जाता है। इसके विपरीत हिंद महासागर पर वायु का दाबव अधिक होता है। पवनो का यह नियम है कि वे अधिक दबाव से कम दबाव वाले प्रदेशों की ओर चलती है। अत: पवने हिंद महासागर से भारत के उत्तरी भाग की ओर चलने लगती है।

ये पवने जलवाष्प से लदी होती है। ये अपनी पूरी आर्द्रता भारत में हीसमाप्त कर देती है। भारत में ये पवने जून से सितंबर तक ही सक्रिय रहती है इसी कारण भारत में अधिकतर वर्षा जून से सितम्बर तक होती है।

3. तमिलनाडु तट पर शीत ऋतु में वर्षा होती है। 

उत्तर: तमिलनाडु में अधिकतर वर्षा उत्तरी- पूर्वी मानसून द्वारा शीतकाल में होती 

है। ये पवने शुष्क होती है परंतु बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गुज़रते समय ये 

पर्याप्त आर्द्रता ग्रहण कर लेती है पूर्वी घाट से टकराकर तमिलनाडु के तट पर 

शीतकाल में ही वर्षा अधकि होती है। 

4. पूर्वी तट के डेल्टा वाले क्षेत्र में प्रायः चक्रवात आते है। 

उत्तर: बंगाल की खाड़ी प्रायः निम्न वायुदाब का क्षेत्र बनता रहता है इसी समय पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा, कावेरी तथा गोदावरी के डेल्टा प्रदेशों में अपेक्षाकृत कम वायुदाब का क्षेत्र होता है। परिणामस्वरूप बंगाल की खाड़ी में भंयकर चक्रवात उठते है जो इन डेल्टाई क्षेत्रों में विनाश करते है।

5. राजस्थान, गुजरात के कुछ भाग तथा पश्चिमी घाट का वृष्टि छाया क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र है। 

उत्तर: राजस्थान में अरावली पर्वत के समांतर दिशा में स्थित होने के कारण अरब सागर से जाने वाली मानसून पवने बिना रोक- टोक गुज़र जाती है जिससे राजस्थन शुष्क रहा जाता है। इसी प्रकार गुजरात का कुछ भाग पश्चिमी घाट की पवनाविमुख ढाल पर अर्थात वृष्टि छाया क्षेत्र में स्थित है। इसलिए ये प्रदेश वर्षा प्राप्त नहीं कर पाते और सूखे रह जाते है। 

प्रश्न 5. भारत की जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिन्नताओं के उदाहरण सहित समझाएं।

उत्तर. भारतीय जलवायु को मानसूनी जलवायु कहा जाता है जिसमे कुछ क्षेत्रीय असमानताएं पाई जाती है। इसका कारण तापमान, वर्षा का रूप तथा मात्रा, वायुदाब, पवनो की दिशा तथा आर्द्रता का भिन्न- भिन्न होना है। इन विभिन्नताओं का निम्न उदाहरणों की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है-

  1. तापमान में अन्तर- किसी भी देश की जलवायु पर वहां के तापमान का बहुत असर पड़ता है और इसमें असमानता से जलवायु में भी विविधता उत्पन्न हो जाती है। उदाहरण के लिए राजस्थान तथा दक्षिणी- पश्चिमी पंजाब में कुछ स्थानों पर तापमान जहां पर 55° सेंटीड्रेड होता है वही जम्मू- कश्मीर के कुछ इलाको जैसे कारगि, द्राश आदि में यह 45° सेंटीग्रेड तक चला जाता है। स्पष्ट तथा इन स्थानों की जलवायु में भी काफी विविधता देखने को मिलती है।
  2. पवनो की दिशा- पवनों की दिशा का भी जलवायु पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। जैसे- अरब सागर से उठने वाली पवने जिनकी दिशा दक्षिण- पश्चिम होती है, उनकी एक शाखा पहले पश्चिमी घाट से टकराकर वहां अत्यधिक वर्षा करती है, वहीं ये पवने आगे बढ़ती हुई जब पूर्वी घाट तक पहुंचती है तो वे अपनी आर्द्रता लगभग खो चुकी होती है। फलस्वरूप तमिलनाडु में भी काफी कम वर्षा होती है। यह भी जलवायु में क्षेत्रीय विभिन्नता का एक उदाहरण है।
  3. वर्षण का रूप- वर्षा किसी भी रूप में हो यह वहां की जलवायु को प्रभावित करती है। यदि वर्षा बर्फ अथवा ओलो के रूप में होती है तो जलवायु अत्यधिक ठंडी होगी।
  4. वर्षा की मात्रा- वर्षा की मात्रा का भी जलवायु में विविधता उत्पन्न करता है।
  5. वर्षा का वस्तुनिष्ठ वितरण- भारत के सभी स्थानों पर एक ही मौसम में वर्षा नहीं होती। कुछ प्रदेशों में जहां गर्मी में वर्षा होती है, वहीं कुछ प्रदेशों में केवल शरद ऋतु में ही वर्षा होती है।

प्र्श्न:6 मानसून अभिक्रिया की व्याख्या करें। 

उत्तर: भारत की जलवायु मानसून पवनो से बहुत अधिक प्रभावित है अरबीवासी जो व्यापारियों की तरह भारत आए थे, उन लोगों ने पवन तंत्र के इस मौसमी उत्क्रमण को मानसून का नाम दिया। मानसून का प्रभाव उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में लगभग 20°उत्तर एवं 20° दक्षिण के बीच रहता है। मानसून की प्रक्रिया को समझने के लिए निम्नलिखित तथ्य महत्वपूर्ण है – 

  1. स्थल तथा जल के गर्म एवं ठंडे होने की विभ्रदी प्रक्रिया के कारण भारत के स्थल भाग पर निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता, जबकि इसके आस – पास के समुद्रों के ऊपर उच्च दाब का क्षेत्र बनता है। 
  2. ग्रीष्म ऋतु के दिनो में अतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र की स्थिति गंगा के मैदान की ओर खिसक जाती है। यह एक विषुवतीय गर्त है। 
  3. हिंद महासागर में मेडागास्कर के पूर्व में लगभग 20° दक्षिण अक्षांश के ऊपर उच्च दाब वाला क्षेत्र होता है। इस उच्च दाब वाले क्षेत्र की स्थिति एवं तीव्रता भारतीय मानसून को प्रभावित करती है। 
  4. ग्रीष्म ऋतु में, तिब्बत का पठार बहुत अधिक गर्म हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप पठार के ऊपर समुद्र तल से लगभग 9 कि. मी. की ऊँचाई पर तीव्र ऊध्वरधार वायु धाराओ एवं उच्च दाब का निर्माण होते है। 

प्र्श्न:7  शीत ऋतु की अवस्था एवं उसकी विशेषताएँ बताएँ। 

उत्तर: उत्तरी भारत में शीत ऋतु मध्य नवंबवर से आरंभ होकर फ़रवरी तक रहती है। भारत के उत्तरी भाग में दिसम्बर एवं जनवरी सबसे ठंडे महीने होते है। तापमान दक्षिण में उत्तर की ओर बठने पर घटना जाता है। पूर्वी तट पर चेन्नई का तापमान 24° सेल्सियस से 25° सेल्सियस के बीच रहना है, जबकि उत्तरी मैदान में यह 10° सेल्सियस 15° सेल्सियस के बीच होता है दिन गर्म तथा राते ठंडी होती है।  इस ऋतु में, देश में उत्तर- पूर्वी व्यापारिक पववे प्रवाहित होती है। ये स्थल से समुद्र की ओर बहती है तथा इसलिए देश के अधिक भाग में शुष्क मौसम होता है। इन पवनो के कारण कुछ मात्रा में वर्षा तमिलनाडु के तट पर होती है क्योंकि ये पवने समुद्र से स्थल की और बहती हैं। 

प्र्श्न:8 भारत में होने वाली मानसूनी वर्षा एवं उसकी विशेषताएँ बताइए। 

उतर: Same as Solution of Question Number 2 Part (ii)

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